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सामुदायिक रेडियो

रेडियो धडकन

 

सन्‌ 2007 में संभव और आइडियोसिंक मीडिया ने यूनीसेफ के सहयोग से म.प्र. में एक सामुदायिक रेडियो पायलेट परियोजना की द्याुरूआत की गई । इस परियोजना का मुखय उद्‌देद्गय समुदाय के सदस्यों का रचनात्मक दृच्च्टिकोंण विकसित करना, स्थानीय विकास की जरूरतों को पहचानना एवं लोगों तक उचित सूचना पहुंचाना है।

प्रथम चरण में लोगों की आद्गयकताओं का अध्ययन किया गया जिसमें यह जानने का प्रयास किया गया कि समुदाय की विद्गोच्चता क्या है वर्तमान में किन संचार माध्यमों का उपयोग होता रहा है स्थानीय विकास के मुद्‌दे क्या है ? तथा सामुदाकिय रेडियो स्टेद्गान में इनकी रूचि को भी जानने का प्रयास किया गया ।

अध्ययन से यह पता चलता है कि क्षेत्र में निवास कर रहे लोग मुखय रूप से कृच्चि, मजदूरी एवं पद्गाुपालन जैसे धन्धों पर आश्रित हैं महिलाऐं घर के कामों के साथ-साथ आयवर्धन में भी जुड़ी हुई है। क्षेत्र जाति, सामाजिक एवं आर्थिक वर्गो के आधार पर बटा हुआ है । पिछड़े वर्ग की कमाई उच्च वर्ग से चार गुना कम है । महिलाओं में द्गिाक्षा का स्तर पुरूच्चों की अपेक्षा कम है।

द्गिावपुरी में जानकारी प्राप्त करने का मुखय स्रोत रेडियो माना जाता है। घर में महिलाऐं एवं बाहर पुरूच्च रेडियों के माध्यम से ही अपने विचारों को रचनात्मक रूप दे सकते हैं। इसके अलावा सूचना के अन्य साधन, गरीबी, बिजली का अभाव, निरक्षरता भी रेडियों के प्रचार व प्रसार बाधक है। जातिवाद भी मीडिया में एक आम व्यक्ति को स्वतंत्र रूप से अपने विचार व्यक्त करने में वाधा डालता है। इस तरह रेडियो इन सब का एक मात्र समाधान है ।

कुछ महत्वपूर्ण एवं विकास की समस्याओं के समाधान में रेडियो हमेद्गाा से ही एक बड़े सूचना केन्द्र के रूप में उभरकर आता रहा है। सामान्यतः सामाजिक एवं विकास की सूचनाऐं महिलाओं तक नहीं पहुंच पाती जिसका एक मात्र साधन रेडियो है। सिर्फ दो तिहाई जनता ही एड्‌स/एच.आई.व्ही. के बारे में जानती है जिसमें महिलाऐं भी द्याामिल हैं ।

स्थानीय समस्याऐं जैसे रोजगार, पानी, बिजली, द्गिाक्षा का घटता स्तर जैसी समस्याओं को सिर्फ रेडियों के माध्यम से उजागर किया जा सकता है । सामान्यतः इन समस्याओं से पिछड़ा वर्ग प्रभावित होता है । सामाजिक कुरीतियां जैसे बाल विवाह, जातिवाद, महिलाओं पर घरेलू हिंसा पर ध्यान केन्द्रित सिर्फ रेडियों के माध्यम से किया जा सकता है । इसके अलावा रेडियो हमेद्गाा से ही स्थानीय सरकार के भृच्च्टाचार को उजागर करने का साधन सिद्ध होता आ रहा है ।

इस तरह यह यह महत्वपूर्ण है कि सामुदायिक रेडियो के प्रति लोगों की रूचि उभरकर समाने आई है । स्थानीय कार्यक्रम जैसे संगीत, घटनाऐं, जानकारी आदि रेडियों के माध्यम से उन्हीं की स्थानीय भाच्च में लोगों तक पहुंचते आ रहे हैं। द्गिावपुरी में पुरूच्चों की अपेक्षा महिलाओं ने संगीत कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर रेडियों की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है ।

सर्वेक्षण से यह निच्च्कर्च्च निकलता है कि सामुदायिक रेडियो समुदाय पर एक सद्गाक्त सकारात्मक प्रभाव डालने में सक्षम हैं तथा सारी वाधित समस्याओं को समाज के समक्ष उजागर करने का एक सद्गाक्त माध्यम बन सकता है।

परिचय (रूपरेखा)

रेडियो धड़कन एक सामुदायिक रेडियो है प्रसार भारतीय विभाग एवं जी.ओ.ई. इसके लिये 107.8 एफ.एम. निद्गिचत करी है । संभव जिसकी नींव द्गिावपुरी में 1986 में रखी गई थी, ने इस सामुदायिक रेडियो की स्थापना यूनीसेफ के आर्थिक एवं तकनीकी सहयोग से कर चुकी है।

सिद्धांतों के आधार पर लोग अपने कार्यक्रम स्वयं पर बनाऐंगे तथा रेडियो धड़कन के माध्यम से स्वयं प्रसारित करेंगे । सामुदायिक रेडियो एक सद्गाक्त एवं सत्य ग्रामीण मीडिया के समान कार्य करेगा।

  • प्रारंभिक उद्‌देद्गय :-
  • समुदाय को द्गिाक्षा, स्वास्थ्य, सफाई और सुरक्षित व्यवहार की जानकारी प्रदान करना ।
  • लोगों तक सही जानकारी पहुंचाना जो कि उन तक नहीं पहुंच पाती ।
  • स्थानीय लोग संस्कृति को बढ़ावा देना तथा स्थानीय लोक कलाकारों को उनकी कला के लिये एक मंच प्रदान करना ।
  • लोगों को सरकारी योजनाओं के बारे में अवगत कराना जिससे वे सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकें ।
  • सहरिया समुदाय को स्थानीय भाच्चा में जानकारी देना एवं उनकी समस्याओं का समाधान करना। सहरिया लोग संस्कृति को प्रोत्साहित करना।

बातचीत व जागरूकता के माध्मय से द्गिाक्षा के निम्न स्तर वाले द्गिावपुरी क्षेत्र में उच्च द्गिाक्षा को प्रोत्साहित करना।

कार्यक्रम का विवरण :-

रेडियो स्टेद्गान के कार्यक्रमों का विस्तार निम्न क्षेत्रों में है - 

  • अधिकार और भेदभाव -
  • जातिवाद
  • लड़की एवं महिलाओं की द्गिाक्षा ।
  • फीमेल फिटिसाइड
  • द्गिाक्षा
  • मा
  • नवाधिकार

महिलाऐं  

  • स्वास्थ एवं स्वच्छता :
  • परिवार नियोजन
  • जीवन स्तर में बदलाव
  • जनसंखया की संखया
  • पर्यावरण एवं पर्यावरण स्वच्छता
  • एच.आई.व्ही./एड्‌स
  • स्वास्थ एवं स्वच्छता
  • स्तनपान

टीकाकरण  

  • जीविकोपार्जन :
  • पलायन
  • कृच्चि एवं फसल कटाई
  • जीविकोपार्जन एवं रोजगार
  • महिला सद्गाक्तिकरण

 


 

 
   

 

 

 

 


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