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  संभव समाज सेवी संस्था
सभी के लिए समान अवसर  अधिकार  एवं न्याय

 

 

ग्राम पंचायत तानपुर जिसकी जनसंख्या- 1500 और 150 परिवार हैं। तानपुर शिवपुरी से 18 कि-मी- दूर है जिसमें रावत समुदाय के लोग ज्यादा रहते हैं गॉव में अन्य समाज के भी लोग रहते हैं जिनमें ब्राहम्ण, जाटव प्रमुख हैं। ग्राम स्तरीय सूक्ष्म नियोजन कार्यक्रम के अन्तर्गत जीरोफेस में टीम जब यहॉ काम कर रही थी - तो लोगों का जुडाव के लिये प्रयास किया गया। लोगों का जिस प्रकार मुद्दों से लगाव देखने को मिला में अपने आप में बडी बात थी क्योंकि इस प्रकार के मुद्दे प्राय: लोगों की, प्राथमिकता पर कम रहते हैं। काफी प्रयास करना पडता है मुद्दों से जोडने में। कुछ मुद्दों के बारे में चर्चा करना चाहूॅगा एक मुद्दा आयोडीन युक्त नमक खाने के फायदों पर था। जिसका प्रभाव गॉव पर ऐसा हुआ कि गॉव के प्रमुख लोगों ने एक बैठक कर इस मुद्दे पर चर्चा की और सभी दुकानदारों को बुलाया गया उनके द्वारा बेचे जा रहे नमक पर चर्चा करते हुये तय कि सभी दुकानदार आयोडीन युक्त नमक ही लायेंगे और बेचेगे। इसी प्रकार घर में उपयोग किये जाने वाले पानी के निष्पादन हेतु सोकपिट स्वयं लोगों ने बनायें। लडकियों की शिक्षा के महत्व को समझते हुये आज गॉव की सभी लडकियों का नाम स्कूल में लिखा है बल्कि वे प्रतिदिन विद्यालय समय से जाती है न जाने पर माता-पिता लडकियों को स्कूल भेजने की कहने लगे हैं। सभी परिवार खुले में शौच के नुकसानों को देखते हुये शौचालय बनाने की प्रक्रिया में जुट गये हैं। बाल विवाह इस गॉव की प्रमुख समस्या थी। कुछ वर्षों से गॉव के पटेल ने इस बात को महसूस किया कि छोटी अवस्था में लडकी की शादी करना ठीक नहीं है। उन्हीं की पहल से गॉव में ही वर्ष में एक बार सामूहिक सम्मेलन आयोजित किये जाने लगे। विगत वर्ष 125 लडके/लडकियों की शादी इसी गॉव में सम्मेलन के तहत हुई लेकिन एक भी बालविवाह न हो इसका पूरा ध्यान रखा गया। जिला प्रशासन द्वारा गठित बाल विवाह रोकने हेतु ब्लाक स्तरीय टीम ने स्वयं जाकर देखा। जो लोग बाल विवाह करना चाह रहे थे। उनके लिये दोनों तरफ के लोगों को बुलाकर समझाया गया साथ ही बालिक होने पर शादी करने की समझाइस दी गई। गॉव का युवा वर्ग भी इन मुद्दों को समझ रहा है और पूरा सहयोग कर रहा है। ग्राम स्तरीय सूक्ष्म नियोजन कार्यक्रम कें अंतर्गत तानपुर एक अग्रणी पंचायत के रूप में उभर कर सामने आई है।

 

शिवपुरी से खोरघार 15 कि-मी- की दूरी पर वसा है जिसमें रावत, जाटव, कुशवाह, ब्राहम्ण, जातियों के लोग रहते हैं। इस गॉव में रावतों की बाहुल्यता है। गॉव में उप स्वास्थ्य केन्द्र है। लेकिन इस केन्द्र पर ए0एन0एम0 ने पूरा कब्जा किया हुआ रहने के साथ-साथ भैंस भी इसी केन्द्र पर रखे हैं जिसका भूसा उप स्वास्थ्य केन्द्र के एक कमरे में भरा है तो अन्य कमरों में स्वयं निवास करती हैं। इस गॉव की जनसंख्या 2500 है और इसी गॉव से लगे हुये गॉव है ढकरोला, खरईभाट, विलूपुरा, पहाडी बसई, रामाबसई, ढोकलबसई इन सबगॉवों के लिये यही सब सेन्टर है जिसमें गर्भवती महिला की जॉच व प्रसव कराया जाना तय है लेकिन ए0एन0एम0 की कार्य के प्रति उदासीनता के कारण लोग घरों पर ही प्रसव अपने तरीकों से कराने लगे। जिसके कारण कई महिलाओं और बच्चों का जीवन खतरे में पड गया। इसी ग्राम की सरोज शर्मा को जब पंचायत एनीमेटर के लिये चुना गया उन्हें प्रशिक्षण दिया गया। उसी प्रशिक्षण में जानकारी गर्भवती महिला की देखभाल, सुरक्षित प्रसव के वारे में बताया गया तो सरोज शर्मा ने अपने गॉव में चल रही असुरक्षित प्रसव की व्यवस्था को बदलने का बीडा उठाया इसके लिये उन्होंने कुछ ऐसी महिलाओं से दोस्ती करनी शुरू की जो उनके विचारों को समझनें में शीघ्रता कर रही थी। उन्हें सुरक्षित प्रसव के फायदों के बारे में बताया साथ ही सरकार द्वारा संस्थागत प्रसव को बढावा देने के लिये योजनाओं की भी जानकारी दी। जिसका परिणाम तुरन्त होने लगा देखते ही देखते सरोज शर्मा ने इस प्रयास से 95 प्रतिशत प्रसव अस्पताल में होने लगे। लोगों को सरोज शर्मा के द्वारा इन प्रयासों की लोगों ने सराहना की साथ ही सरकार के द्वारा सामाजिक स्वास्थ्य कार्य के लिये कार्यकर्ता ‘‘आशा’’ के लिये ग्राम सभा से सर्व सम्मति से चयन किया गया।

ग्राम पंचायत विलोकला जो शिवपुरी से 16 कि-मी- दूरी पर बसा है इस गॉव में रावत समुदाय की बाहुल्यता है ग्राम पंचायत विलोकला में ही इस गॉव के सचिव व सरपंच निवास करते हैं। विलेज पिलानिंग के जीरोफेस में जब यहॉ परिवार प्रपत्र भरे जा रहे थे तो एक बात यह निकलकर आई कि किसी भी बच्चे को जन्म प्रमाण-पत्र नहीं दिये गये थे। जब इसका कारण जानना चाहा तो पता चला कि किसी ने दिया ही नहीं। यह उन बच्चों की बात है जिनकी उम्र 1 माह से 2 वर्ष के बीच की थी इनमें से किसी के पास भी जन्म प्रमाण पत्र नहीं है। जन्म प्रमाण पत्र के फायदों व कहॉ से प्राप्त होता है इस पर समुदाय के साथ चर्चा की गई। जिसमें बताया कि जन्म प्रमाण-पत्र बच्चे की पहली पहचान है साथ ही आगे के जीवन में उसे काफी उपयोगी है। आपको इसके लिये कोई पैसा भी नहीं देने पडते हैं। इस पर लोगों ने कहा कि सचिव तो हमें प्रमाण पत्र देता ही नहीं। सचिव से जब पूछा गया कि क्यों प्रमाण पत्र नहीं देते हो तो उसने कहा कि कोई लेने ही नहीं आता है इसलिये अपने पास ही रखे हैं। इसके बाद सभी गॉव वालों के साथ तय हुआ कि विगत दो वर्षों के जन्में बच्चों के प्रमाण-पत्र सचिव बनाकर आज ही दे। जन्म प्रमाण पत्र वितरण की जिम्मेदारी संस्था एनीमेटर, ऑगनवाडी कार्यकर्ता व सचिव की होगी और इस प्रकार 84 जन्म प्रमाण पत्र पत्र वॉटे गये आगे से यह तय हुआ कि जिनके यहॉ भी बच्चा होगा वह स्वयं सचिव के यहॉ पंजीयन करायेगा और प्रमाण-पत्र लेगा।

ग्राम रायश्री जो कि गुना रोड पर शिवपुरी से 11 कि-मी- की दूरी पर स्थित है इस गॉव में पिछडा वर्ग की वाहुल्यता है अन्य समाज के लोग भी निवास करते हैं। इस गॉव में 396 परिवार निवास करते हैं जिना मुख्य व्यवसाय कृषि कार्य व पशुपालन है इस गॉव में ग्राम स्तरीय सूक्ष्म नियोजन कार्यक्रम के तहत कार्य किया जा रहा है इस कार्यक्रम के अंतर्गत आयोडीन युक्त नमक के उपयोग के फायदों पर लोगों को बताना था। जब इस पर चर्चा की जाती है तो गॉव के लोग एक ही बात करते कि दुकानदार जैसा भी नमक लाते हम सब लोग उसी का उपयोग करते हैं। इसके लिये तो दुकानदारों से कहना पडेगा। इसके लिये महिलाओं के साथ पंचायत एनीमेटर ने चर्चा की हम सब मिलकर इन दुकानदारों के यहॉ जाकर बात करेंगे तभी कुछ हो सकता है। गॉव की महिलायें व पंचायत ऐनीमेटर गॉव के दुकानदारों के पास पहुॅचे तो उन्होंने कहा कि हम जो नमक लाते हैं उस नमक में आयोडीन रहता है तब पंचायत एनीमेटर ने कहा तो अपना नमक चैक करायें इस पर दुकानदार भडक उठा आप क्यों चैक कर रहे हैं आपको कौन सा अधिकार है उसे बताया कि गांव के लोग यह जानना चाहते हैं कि हम लोग सही नमक खा भी रहे हैं या गलत नमक खा रहे हैं और इस गॉव में आप भी रहते हैं आपके परिवार को भी यही नमक खाना पडता है बिना आयोडीन युक्त नमक हमारे बच्चों के मानसिक विकास को रोकता है और घेंघा रोग को बढावा देता है। तब जाकर दुकानदारों ने नमक चैक करने दिया जिसके तहत 11 दुकानदारों में सिर्फ 3 दुकानदारों के यहॉ सामान्य, आयोडीन युक्त नमक पाया गया बाकी 8 इुकानदारों के यहॉ बिना आयोडीन युक्त नमक पाया गया। इस पर दुकानदारों ने अपना तर्क दिया कि गॉव के लोग महॅगा नमक नहीं लेते हैं इसलिये यह नमक रखा है और हमें मुनाफा भी इसी नमक में ज्यादा हैं दुकानदारों की बातों के जबाब में बताया कि आप सही कह रहे हो लेकिन मॉ और बच्चे के स्वास्थ्य से वढकर आपका मुनाफा तो नही है। समुदाय ने कहा कि हमें जब ये बातें पता चली है तो दुकानदारों आप नमक सही आयोडीन युक्त नमक ही लाओ हम लोग खरीदेंगे। पैसों में तो अन्तर है लेकिन जो नुकसान हो रहा है उससे बढकर नहीं है। इस पर दुकानदारों ने कहा कि अगली बार से आयोडीन युक्त नमक ही लायेंगे और उसी को ही बेचेंगे।

मुख्यालय शिवपुरी से 17 कि-मी- दूर पर बसे लालगढ गॉव में पिछडा वर्ग की वाहुल्यता है गॉव में और भी समाज के लोग रहते हैं इस गॉव में जब विलेज पिलानिंग की जा रही थी। तब चर्चा में निकला कि जब से गॉव के किनारे से रोड निकल गया है तब से खुले में शौच जाने में परेशानी होने लगी। क्योंकि पहले कहीं भी खुले में शौच कर सकते थें। महिलाओं से हुई चर्चा में उन्होंने बताया कि सबसे ज्यादा परेशानी तो हमें होती है रोड किनारे बैठकर ही शौच कर सकते हैं क्योंकि खेतों व झाडियों में शौच के लिये जाना खतरे से खाली नहीं है। खुले में शौच करने का एक मात्र स्थान रोड के किनारे होता है वहॉ भी बडी मुश्किल से शौंच कर पाते हैं। क्योंकि साइकिल/मोटर साइकिल वाले जान बूझकर घण्टी/होर्न बचाते है शौच के बीच में ही खडा होना पडता है इससे शौच भी साफ नहीं उतरती है और पेट में दर्द बना रहता है। जवान लडकियों की इससे भी ज्यादा परेशानी है क्योंकि गॉव के कुछ लडके जवान लडकियों को शौच को जाते समय अक्सर गाने गाना, शीटी बजाना उनकी आदत में हो गया है। बुजुर्ग लोग व बीमार व्यक्ति भी खुले में शौच जाने में परेशानी का अनुभव करते हैं। इन सबसे चर्चा के बाद जो समाधान निकला वह था व्यक्तिगत शौचालय इस पर पंचायत सचिव ने बताया कि सरकार द्वारा गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को 1200 रूपये शौचालय बनाने का अनुदान सरकार द्वारा दिया जाता है। इस बात को सुनकर 42 लोग तुरंत तैयार हो गये जिनका नाम बी-पी-एल- सूची में था। सूची भेजने के 15 दिन में पैसा पंचायत के खाते में आ गया। आज 42 शौचालय जहॉ बनने की प्रक्रिया पूर्ण कर रहे हैं वहीं ए-पी-एल- परिवार भी शौचालय बनवाने की सोच रहे हैं।


 

 
   

 

 

 

 


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